महाराष्ट्र सरकार ने माना है कि चार साल में राज्य में 12 हजार से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी कर ली है। हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश से कहीं बढ़कर वह किसानों को कृषि संकट से उबारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार के मुताबिक उसी लोन माफी योजना का लाभ 50 लाख से ज्यादा किसानों को मिल चुका है। सरकार ने किसानों से अपील की है वह आत्महत्या करने का ख्याल भी अपने मन में न लाएं। गौरतलब है कि राज्य में सूखे की स्थिति ने हालत को और भी गंभीर बना दिया है।

 

महाराष्ट्र में जनवरी, 2015 से दिसंबर, 2018 के बीच 12,021 किसानों ने आत्महत्या की है। इसका मतलब ये हुआ कि वहां रोजाना दी गई अवधि में 8 किसानों को मजबूरन खुदकुशी करनी पड़ी है। शुक्रवार को राज्य के सहकारिता एवं पुर्वास मंत्री सुभाष देशमुख ने विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह बात कबूल की है। इसका मतलब है कि पीछे के चार वर्षों में राज्य में हर साल औसतन 3,005 किसानों ने खुदकुशी की। सूखे की मार और किसानों की बदलहाली का आलम ये है कि इस साल जनवरी से मार्च तक ही 610 किसान अपनी जान दे चुके हैं। देशमुख ने किसानों से कहा है, ‘सरकार लोन माफी के अपने वादे को पूरा करेगी। अब तक 50 लाख किसानों को लोन माफी योजना का फायदा मिला है। मैं किसानों को भरोसा दिलाता हूं कि सरकार उनके साथ है। मैं उनसे अपील करता हूं कि आत्महत्या न करें।’

 

 

 

 

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